“पानी माँगा था साहब, बदले में मिली मौत; मेरी बेटी की दुनिया उजड़ गई और चार बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया”


पानी माँगा था साहब, बदले में मिली मौत; मेरी बेटी की दुनिया उजड़ गई और चार बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया”

मेरा नाम मुन्नी बनवासी है। मेरी उम्र- लगभग 60 वर्ष, है। मेरे पति का नाम कमला बनवासी था। मैं ग्राम एवं पोस्ट गोसाईपुर मोहाव (बढ़की बारी), थाना-चोलापुर, जिला-वाराणसी की रहने वाली हूँ।मेरी बेटी का नाम सीता देवी है। उसकी उम्र- लगभग 40 वर्ष है। उसके पति का नाम रामजनम बनवासी था। मेरी बेटी के चार बच्चे हैं| एक बेटी और तीन बेटे। सभी बच्चे अभी छोटे हैं। मेरी बेटी और मेरा दामाद मजदूरी करके किसी तरह अपने परिवार का पेट पालते थे।करीब एक वर्ष से मेरी बेटी अपने पति रामजनम के साथ कादीपुर कला, थाना-चौबेपुर, वाराणसी स्थित स्टार मार्का भट्ठे पर मजदूरी कर रही थी। गरीबी थी, लेकिन दोनों मेहनत करके अपने बच्चों को पाल रहे थे। मेरी बेटी को क्या पता था कि एक दिन उसका पति इस दुनिया से चला जाएगा और उसके बच्चों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ जाएगा।मेरे दामाद की तबीयत कुछ समय से खराब चल रही थी। एक दिन उन्होंने मेरी बेटी सीता से कहा कि उन्हें उनकी बहन चिंता के पास रौनाबारी पहुँचा दे। मेरी बेटी उन्हें लेकर रौनाबारी गई। वहाँ उन्हें नाश्ता-पानी कराने के बाद वह अपने पति को वहीं छोड़कर मोहाव बढ़की बारी वापस आ गई।

मेरी बेटी को क्या पता था कि पति से यह उसकी आखिरी मुलाकात है।इसके तीन दिन बाद थाना चोलापुर से एक पुलिसकर्मी और पूर्व प्रधान मेरी बेटी के पास आए। वे “सीता-सीता”कहकर उसे बुलाने लगे। मेरी बेटी ने पूछा—“क्या हुआ?”तब प्रधान जी ने मोबाइल में एक वीडियो दिखाते हुए कहा—“यह तुम्हारा पति है।”मोबाइल में अपने पति को देखते ही मेरी बेटी के होश उड़ गए। वह रोने और चिल्लाने लगी। उसकी आँखों के सामने जैसे पूरी दुनिया अंधेरी हो गई। मैं अपनी बेटी को रोते हुए देख रही थी, लेकिन खुद भी समझ नहीं पा रही थी कि आखिर उसके पति के साथ क्या हो गया।

इसके बाद पुलिस और प्रधान जी मेरी बेटी सीता और मुझे थाना ले गए। वहीं जाकर हमें पता चला कि मेरे दामाद की लाश चीरघर भेज दी गई है। उनकी डेड बॉडी तीसरे दिन मिली थी।बाद में हमें पता चला कि 20 अगस्त को भरथरा गाँव, हड़ियाडीह भट्ठे के बगल के एक लड़के ने वीडियो बनाया था।उस वीडियो को देखकर आज भी मेरी रूह कांप जाती है।वीडियो में मेरे दामाद रामजनम बनवासी को पेड़ से बाँधकर भट्ठा मालिक सरजू मार्का के लोगों द्वारा बेरहमी से पीटा जा रहा था। उन्हें लाठियों से मारा जा रहा था। उन्हें पेड़ में उल्टा लटकाकर भी पीटा गया।और उस वीडियो में मेरे दामाद की आवाज...आज भी मेरे कानों में गूंजती है—“बचाओ... बचाओ... मैं चोरी करने नहीं आया था।

मैं साहब, पानी पीने आया था। साहब, मेरा यकीन करिए। मैं मजदूर आदमी हूँ। आपके मजदूर से मुझे प्यास लगी थी, जिससे रहा नहीं गया तो पानी माँग बैठा। यही मेरा कसूर है।”

जब मैंने अपने दामाद की यह आवाज सुनी तो मेरा कलेजा फट गया।वह आदमी किसी से अपना हक नहीं माँग रहा था। वह कोई बड़ी चीज नहीं माँग रहा था। वह सिर्फ पानी माँग रहा था।वह एक गरीब मजदूर था। दिनभर मेहनत करता था। अपने बच्चों के लिए रोटी कमाता था। उस दिन उसे प्यास लगी थी और उसने पानी माँग लिया।क्या पानी माँगना इतना बड़ा अपराध था?उसे इतना मारा गया कि वह अधमरा हो गया। इसके बाद उसकी जान चली गई और उसकी लाश आम के पेड़ के बगल में धान के खेत में फेंक दी गई।

आज भी मैं यही सोचती हूँ कि मेरे दामाद ने आखिर किसका क्या बिगाड़ा था?

उसकी पत्नी और चार छोटे बच्चे उसका इंतजार कर रहे थे। बच्चों को क्या पता था कि उनका पिता वापस नहीं आएगा। मेरी बेटी को क्या पता था कि जिस पति को वह कुछ दिन पहले छोड़कर आई है, अब वह कभी उसके सामने खड़ा नहीं होगा।इस घटना के बाद मेरी बेटी और हम सभी पूरी तरह टूट गए।इसके बाद SSP साहब, CO साहब, SO साहब और दरोगा जी चार गाड़ियों से मौके पर गए थे। वहाँ लोगों के बयान लिए गए। उसी दौरान उस लड़के ने पुलिस को बताया—“साहब, मेरे पास वीडियो है।”लेकिन इसके बाद उस लड़के के साथ जो हुआ, उसने हमारी चिंता और बढ़ा दी।पुलिस उस लड़के को वीडियो के साथ थाना ले गई। वहाँ उसे बंद करके डराया-धमकाया गया और उससे पूछा गया|

वीडियो कहाँ है?”डर के कारण उस लड़के ने वीडियो दे दिया। इसके बाद उसे कथित रूप से धमकी दी गई—“तुम आज के बाद दिखाई मत देना।”जब हम उसके गाँव गए और पूछा कि “मुन्ना कहाँ है?”, तो उसका कोई पता नहीं चला। हम उसके घर भी गए,लेकिन वहाँ भी उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।हम परेशान होकर थाना गए और थानाध्यक्ष से पूछा—“साहब, जिस लड़के को आप मुन्ना को लेकर आए थे, उसे वीडियो लेने के बाद कहाँ छोड़ा?”हम आज तक उस लड़के को लेकर चिंतित हैं। जिसने मेरे दामाद के साथ हुई घटना का सच कैमरे में कैद किया, अगर वही लड़का आज कहीं दिखाई नहीं दे रहा है तो हमारे मन में डर पैदा होना स्वाभाविक है।मैं एक माँ हूँ। अपनी बेटी की हालत देखकर मेरा कलेजा फट जाता है।मेरी बेटी की आँखों के सामने उसका पूरा परिवार उजड़ गया।उसका पति चला गया।चार छोटे-छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।जिस आदमी के साथ वह अपने बच्चों का भविष्य बनाने के सपने देखती थी, आज उसी आदमी की तस्वीर देखकर उसे रोना पड़ता है।मेरी बेटी बार-बार यही सोचती है| “अगर उस दिन मेरे पति को सिर्फ एक गिलास पानी दे दिया जाता, तो शायद आज वह मेरे साथ होते।”मैं अपनी बेटी को क्या जवाब दूँ?मैं अपने नाती-नातिन को क्या समझाऊँ?वे बच्चे अपने पिता को ढूँढेंगेतो मैं उन्हें क्या बताऊँगी?मेरे दामाद की आवाज आज भी हमारे घर में गूंजती है|

बचाओ... मैं चोरी करने नहीं आया था... मैं मजदूर आदमी हूँ... प्यास लगी थी... पानी माँगा था... यही मेरा कसूर है।”

यह आवाज मेरे लिए सिर्फ एक आवाज नहीं है। यह मेरी बेटी के उजड़े हुए घर की आवाज है। यह चार छोटे बच्चों के छिन गए बचपन की आवाज है। यह एक गरीब मजदूर परिवार की चीख है।मैं आज भी सोचती हूँ| अगर उस दिन मेरे दामाद को पानी मिल गया होता, तो मेरी बेटी आज विधवा नहीं होती। उसके चार छोटे बच्चे बिना पिता के नहीं होते। मेरे नाती-नातिन अपने पिता के प्यार से वंचित नहीं होते।एक गिलास पानी किसी की जान से बड़ा नहीं हो सकता।लेकिन मेरे दामाद ने पानी माँगा और बदले में उन्हें मौत मिली।मैं चाहती हूँ कि मेरे दामाद रामजनम बनवासी की मौत की निष्पक्ष जाँच हो। वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोगों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

जिस लड़के ने इस घटना का वीडियो बनाया था, उसके बारे में भी पता लगाया जाए। यदि उसे धमकी दी गई है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि सच सामने आ सके।

मैं गरीब हूँ। मेरे पास न पैसा है, न कोई बड़ा सहारा। मेरे पास सिर्फ अपनी बेटी और उसके चार छोटे बच्चे हैं।मैं सरकार और प्रशासन से बस इतना चाहती हूँ कि मेरी बेटी और उसके बच्चों को न्याय मिले।मेरे दामाद की मौत को यूँ ही भुला न दिया जाए।आज मैं अपनी बेटी और उसके चार छोटे बच्चों को देखकर केवल यही पूछती हूँ|“आखिर मेरे दामाद का अपराध क्या था? क्या एक गरीब मजदूर का पानी माँगना इतना बड़ा अपराध था कि उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा?”उसने पानी माँगा था साहब...उसे पानी नहीं मिला।उसे न्याय भी देर से नहीं, बल्कि अभी चाहिए।

 

पानी माँगा था साहब बदले में मिली मौत, अब चार छोटे बच्चों से छिन गया पिता का साया”

मेरा नाम सीता देवी है और मेरी उम्र लगभग 40 वर्ष, है। मेरे पति का नाम रामजनम बनवासी है| मैं ग्राम-धरायन, थाना-धानापुर, जिला-चंदौली की रहने वाली हूँ। मेरे चार बच्चे हैं, जिनमें एक बेटी और तीन बेटे हैं। मेरे सभी बच्चे अभी छोटे हैं। मेरे पति मजदूरी करके किसी तरह हमारे परिवार का पालन-पोषण करते थे।मैं अपने पिता कमला बनवासी, पुत्र स्वर्गीय श्यामनाथ बनवासी, निवासी ग्राम व पोस्ट गोसाईपुर मोहाव (बढ़की बारी), थाना-चोलापुर, वाराणसी के साथ करीब एक वर्ष से अपने पति रामजनम बनवासी के साथ रहकर कादीपुर कला, थाना-चौबेपुर, वाराणसी में स्टार मार्का भट्ठे पर लेबर का काम करती थी।

मेरे पति की तबीयत कुछ समय से खराब चल रही थी। एक दिन मेरे पति ने मुझसे कहा कि मुझे मेरी बहन चिंता के पास रौनाबारी पहुँचा दो। अपने पति की बात सुनकर मैं उन्हें लेकर अपनी नन्द के घर रौनाबारी चली गई। वहाँ नाश्ता-पानी कराने के बाद मैं अपने पति को वहीं छोड़कर मोहाव बढ़की बारी वापस आ गई।लेकिन मुझे क्या पता था कि यह मेरे पति से मेरी आखिरी मुलाकात होगी।इसके तीन दिन बाद थाना चोलापुर से एक पुलिसकर्मी और पूर्व प्रधान मेरे पास आए। वे मुझे “सीता-सीता” कहकर चिल्लाने लगे। मैंने पूछा कि क्या हुआ? तब प्रधान जी ने मुझे मोबाइल में एक वीडियो दिखाते हुए कहा कि “यह तुम्हारा पति है।”जैसे ही मैंने मोबाइल में अपने पति को देखा, मैं रोने और चिल्लाने लगी। मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। इतने में पुलिस और प्रधान जी मुझे और मेरे पिता कमला को थाना ले गए। वहीं जाकर मुझे पता चला कि मेरे पति की लाश चीरघर भेज दी गई है। मेरे पति की डेड बॉडी तीसरे दिन मिली थी।बाद में मुझे पता चला कि 20 अगस्त को भरथरा गाँव, हड़ियाडीह भट्ठे के बगल के एक लड़के ने वीडियो बनाया था। उस वीडियो में जो दृश्य था, उसे देखकर आज भी मेरा कलेजा कांप उठता है।

 

वीडियो में दिखाई दे रहा था कि मेरे पति को पेड़ से बाँधकर भट्ठा मालिक सरजू मार्का के लोग बेरहमी से मार रहे थे। मेरे पति को लाठी से मारा जा रहा था। उन्हें पेड़ में उल्टा लटकाकर भी पीटा गया। मेरे पति वीडियो में लगातार चिल्ला रहे थे—“बचाओ... बचाओ... मैं चोरी करने नहीं आया था। मैं साहब, पानी पीने आया था। साहब, मेरा यकीन करिए। मैं मजदूर आदमी हूँ। आपके मजदूर से मुझे प्यास लगी थी, जिससे रहा नहीं गया तो पानी माँग बैठा। यही मेरा कसूर है।”मेरे पति की ये बातें सुनकर मेरा दिल फट जाता है। वह सिर्फ प्यासे थे। उन्होंने केवल पानी माँगा था। लेकिन किसी ने उनकी चीख-पुकार नहीं सुनी।उन्हें मारते-मारते अधमरा कर दिया गया। इसके बाद उन्हें जान से मारकर आम के पेड़ के बगल में धान के खेत में फेंककर वे लोग भाग गए।मेरे पति ने किसी का क्या बिगाड़ा था? वह एक गरीब मजदूर थे। दिन-रात मेहनत करके अपने बच्चों का पेट पालते थे। उनकी इतनी सी गलती थी कि उन्हें प्यास लगी और उन्होंने पानी माँग लिया।

जब यह सब हुआ, तो मुझे बस्ती बढ़की बारी लेकर चले आए।

इसके बाद SSP साहब, CO साहब, SO साहब और दरोगा जी चार गाड़ियों से मौके पर गए थे। वहाँ लोगों के बयान लिए गए। उसी दौरान उस लड़के ने पुलिस को बताया कि “साहब, मेरे पास वीडियो है।”लेकिन इसके बाद भी उस लड़के के साथ जो हुआ, उसने मेरी चिंता और बढ़ा दी।पुलिस उस लड़के को वीडियो के साथ थाना ले गई। वहाँ उसे बंद करके डराया-धमकाया गया और उससे पूछा गया कि “वीडियो कहाँ है?”

उस लड़के ने डर के कारण वीडियो दे दिया। इसके बाद उस लड़के को धमकी दी गई कि “तुम आज के बाद दिखाई मत देना।”

जब हम उसके गाँव गए और पूछा कि “मुन्ना कहाँ है?” तो उस लड़के का कोई पता नहीं चला। इसके बाद हम उसके घर भी गए, लेकिन वहाँ भी मुन्ना के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।हम परेशान होकर थाना गए। वहाँ हमने थानाध्यक्ष साहब से पूछा

साहब, जिस लड़के को आप मुन्ना को लेकर आए थे, उसे वीडियो लेने के बाद कहाँ छोड़ा?”

तब जाकर थानाध्यक्ष साहब थोड़ा सक्रिय हुए। अगर हम लगातार पूछताछ नहीं करते तो शायद किसी को यह भी पता नहीं चलता कि उस लड़के के साथ क्या हुआ।

आज मैं अपने पति को खो चुकी हूँ। मेरे चार छोटे-छोटे बच्चे हैं। उनके सिर से पिता का साया उठ गया है। मैं खुद एक गरीब मजदूर महिला हूँ। मेरे पति हमारे परिवार का सहारा थे। उनकी मौत ने हमारे पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है।

मेरे पति ने केवल पानी माँगा था, लेकिन उन्हें ऐसी बेरहमी से पीटा गया कि उनकी जान चली गई। आज भी मेरे कानों में उनकी आवाज गूंजती है|

 

बचाओ... मैं चोरी करने नहीं आया था... मैं मजदूर आदमी हूँ... प्यास लगी थी... पानी माँगा था... यही मेरा कसूर है।”

मैं आज भी यह सोचकर रोती हूँ कि अगर उस दिन मेरे पति को सिर्फ एक गिलास पानी दे दिया जाता, तो शायद वह आज हमारे बीच होते। मेरे बच्चे आज अपने पिता के साथ होते। मेरा परिवार इस तरह उजड़ता नहीं।

मैं चाहती हूँ कि मेरे पति की मौत की निष्पक्ष जाँच हो, वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो और मेरे परिवार को न्याय मिले। साथ ही, उस लड़के के बारे में भी पता लगाया जाए जिसने वीडियो बनाया था और जिसे पुलिस द्वारा वीडियो लेने के बाद धमकी दी गई थी। मेरे परिवार को डर है कि उसके साथ भी कुछ गलत हो सकता है।

मेरे पति की मौत केवल एक गरीब मजदूर की मौत नहीं है। यह उस दर्द की कहानी है जिसमें एक मजदूर ने पानी माँगा और बदले में उसे अपनी जान गंवानी पड़ी। आज मैं अपने छोटे-छोटे बच्चों को देखकर केवल यही सोचती हूँ कि उनके पिता को आखिर किस अपराध की सजा दी गई?

पानी माँगा था साहब, बदले में मिली मौत; मेरी बेटी की आँखों के सामने उसका परिवार उजड़ गया”

 

मेरा नाम कमला बनवासी है। मेरी उम्र- 70 वर्ष है| मेरे पिता का नाम स्वर्गीय श्यामनाथ बनवासी है। मैं ग्राम व पोस्ट गोसाईपुर मोहाव (बढ़की बारी), थाना-चोलापुर, जिला-वाराणसी का रहने वाला हूँ। मेरी बेटी का नाम सीता देवी है, जिसकी उम्र लगभग 40 वर्ष है। मेरी बेटी के पति का नाम रामजनम बनवासी था। मेरी बेटी के चार बच्चे हैं, जिनमें एक बेटी और तीन बेटे हैं। सभी बच्चे अभी छोटे हैं।मेरी बेटी और मेरा दामाद मजदूरी करके किसी तरह अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। मेरी बेटी करीब एक वर्ष से अपने पति रामजनम बनवासी के साथ कादीपुर कला, थाना-चौबेपुर, वाराणसी में स्टार मार्का भट्ठे पर लेबर का काम करती थी।

मेरे दामाद की तबीयत कुछ समय से खराब चल रही थी। एक दिन उन्होंने मेरी बेटी सीता से कहा कि उन्हें उनकी बहन चिंता के पास रौनाबारी पहुँचा दे। मेरी बेटी अपने पति की बात सुनकर उन्हें लेकर अपनी नन्द के घर रौनाबारी चली गई। वहाँ नाश्ता-पानी कराने के बाद मेरी बेटी अपने पति को वहीं छोड़कर मोहाव बढ़की बारी वापस आ गई।

 

मेरी बेटी को क्या पता था कि यह उसके पति से उसकी आखिरी मुलाकात होगी।इसके तीन दिन बाद थाना चोलापुर से एक पुलिसकर्मी और पूर्व प्रधान मेरी बेटी के पास आए। वे “सीता-सीता” कहकर चिल्लाने लगे। मेरी बेटी ने पूछा कि क्या हुआ? तब प्रधान जी ने उसे मोबाइल में एक वीडियो दिखाते हुए कहा कि “यह तुम्हारा पति है।”

मोबाइल में अपने पति को देखते ही मेरी बेटी रोने और चिल्लाने लगी। उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। इसके बाद पुलिस और प्रधान जी मेरी बेटी सीता और मुझे थाना ले गए। वहीं जाकर हमें पता चला कि मेरे दामाद की लाश चीरघर भेज दी गई है। मेरे दामाद की डेड बॉडी तीसरे दिन मिली थी।बाद में हमें पता चला कि 20 अगस्त को भरथरा गाँव, हड़ियाडीह भट्ठे के बगल के एक लड़के ने वीडियो बनाया था। उस वीडियो में जो दृश्य था, उसे देखकर आज भी मेरा कलेजा कांप उठता है।वीडियो में दिखाई दे रहा था कि मेरे दामाद रामजनम बनवासी को पेड़ से बाँधकर भट्ठा मालिक सरजू मार्का के लोग बेरहमी से मार रहे थे। उन्हें लाठी से मारा जा रहा था। उन्हें पेड़ में उल्टा लटकाकर भी पीटा गया।वीडियो में मेरे दामाद लगातार चिल्ला रहे थे|

बचाओ... बचाओ... मैं चोरी करने नहीं आया था। मैं साहब, पानी पीने आया था। साहब, मेरा यकीन करिए। मैं मजदूर आदमी हूँ। आपके मजदूर से मुझे प्यास लगी थी, जिससे रहा नहीं गया तो पानी माँग बैठा। यही मेरा कसूर है।”मेरे दामाद की यह आवाज सुनकर मेरा कलेजा फट जाता है। वह एक गरीब मजदूर आदमी था। उसे केवल प्यास लगी थी और उसने पानी माँगा था। लेकिन उसकी चीख-पुकार सुनने वाला कोई नहीं था।

उसे मारते-मारते अधमरा कर दिया गया। इसके बाद उसे जान से मारकर आम के पेड़ के बगल में धान के खेत में फेंककर वे लोग भाग गए।मैं आज भी सोचता हूँ कि मेरे दामाद ने आखिर किसी का क्या बिगाड़ा था? वह एक गरीब मजदूर था। दिन-रात मेहनत करके अपने परिवार और छोटे-छोटे बच्चों का पेट पालता था। उसकी इतनी सी गलती थी कि उसे प्यास लगी और उसने पानी माँग लिया।जब यह सब हुआ, तो मेरी बेटी को बस्ती बढ़की बारी लेकर चले आए।इसके बाद SSP साहब, CO साहब, SO साहब और दरोगा जी चार गाड़ियों से मौके पर गए थे। वहाँ लोगों के बयान लिए गए। उसी दौरान उस लड़के ने पुलिस को बताया कि “साहब, मेरे पास वीडियो है।”लेकिन इसके बाद उस लड़के के साथ जो हुआ, उससे हमारी चिंता और बढ़ गई।पुलिस उस लड़के को वीडियो के साथ थाना ले गई। वहाँ उसे बंद करके डराया-धमकाया गया और उससे पूछा गया कि “वीडियो कहाँ है?”उस लड़के ने डर के कारण वीडियो दे दिया। इसके बाद उस लड़के को धमकी दी गई कि “तुम आज के बाद दिखाई मत देना।”जब हम उसके गाँव गए और पूछा कि “मुन्ना कहाँ है?” तो उस लड़के का कोई पता नहीं चला। इसके बाद हम उसके घर भी गए, लेकिन वहाँ भी मुन्ना के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।हम परेशान होकर थाना गए। वहाँ हमने थानाध्यक्ष साहब से पूछा—

साहब, जिस लड़के को आप मुन्ना को लेकर आए थे, उसे वीडियो लेने के बाद कहाँ छोड़ा?”

तब जाकर थानाध्यक्ष साहब थोड़ा सक्रिय हुए। अगर हम लगातार पूछताछ नहीं करते तो शायद किसी को यह भी पता नहीं चलता कि उस लड़के के साथ क्या हुआ।

आज मेरी बेटी अपने पति को खो चुकी है। मेरी बेटी के चार छोटे-छोटे बच्चे हैं। उन बच्चों के सिर से उनके पिता का साया उठ गया है। मेरी बेटी खुद एक गरीब मजदूर महिला है। उसका पति ही उसके परिवार का सहारा था। उसकी मौत ने मेरी बेटी और उसके पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है।एक पिता होने के नाते मैं अपनी बेटी को इस हालत में देखकर अंदर से टूट गया हूँ। मैं अपनी बेटी की आँखों में अपने पति को खोने का दर्द देखता हूँ। वह बार-बार यही सोचती है कि अगर उस दिन उसके पति को सिर्फ एक गिलास पानी दे दिया जाता तो शायद आज वह जिंदा होते।मेरे दामाद ने केवल पानी माँगा था, लेकिन उन्हें ऐसी बेरहमी से पीटा गया कि उनकी जान चली गई। आज भी उनकी आवाज हमारे कानों में गूंजती है|

बचाओ... मैं चोरी करने नहीं आया था... मैं मजदूर आदमी हूँ... प्यास लगी थी... पानी माँगा था... यही मेरा कसूर है।

मैं आज भी यह सोचकर रोता हूँ कि अगर उस दिन मेरे दामाद को पानी मिल गया होता, तो मेरी बेटी आज विधवा नहीं होती। उसके चार छोटे-छोटे बच्चे आज बिना पिता के नहीं होते। मेरा नाती-नातिन अपने पिता के प्यार से वंचित नहीं होते। मेरा पूरा परिवार इस तरह उजड़ता नहीं। मेरी बेटी और उसके बच्चों के सामने अब पूरा जीवन पड़ा है। लेकिन उनके परिवार का सहारा छिन गया है। मैं गरीब आदमी हूँ और अपनी बेटी तथा उसके चार छोटे बच्चों का भविष्य सोचकर बहुत परेशान हूँ।

मैं चाहता हूँ कि मेरे दामाद रामजनम बनवासी की मौत की निष्पक्ष जाँच हो। वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और मेरी बेटी तथा उसके बच्चों को न्याय मिले।साथ ही, उस लड़के के बारे में भी पता लगाया जाए जिसने मेरे दामाद के साथ हुई मारपीट का वीडियो बनाया था और जिसे पुलिस द्वारा वीडियो लेने के बाद धमकी दी गई थी। हमारे परिवार को डर है कि उसके साथ भी कुछ गलत हो सकता है। उसके बारे में पता लगाना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

मेरे दामाद की मौत केवल एक गरीब मजदूर की मौत नहीं है। यह एक ऐसे परिवार की कहानी है जिसका सहारा छीन लिया गया। उसने पानी माँगा था और बदले में उसे मौत मिली।आज मैं अपनी बेटी और उसके चार छोटे बच्चों को देखकर केवल यही सोचता हूँ

आखिर मेरे दामाद को किस अपराध की सजा दी गई? क्या एक गरीब मजदूर का पानी माँगना इतना बड़ा अपराध था कि उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा|

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